Zindagi ye Kadam-Kadam Poetry by G Shastri

ज़िंदगी ये कदम कदम, लेगी तेरा इम्तिहान। किसका है तुझे इंतजार, अ दिल-ए-नादान।

कोई ना तुझे बहलायेगा, हर दर्द तुझे रुलायेगा। कोई तुझे पुकारे ऐसी ना कोई पहचान। ज़िंदगी ये कदम कदम, लेगी तेरा इम्तिहान।

दर्द-ए-दुनिया में जी ले, यादों का जहर मुफ्त पी ले। लावारिश लाश बना जिस्म, बदन से जुदा है जान। ज़िंदगी ये कदम कदम, लेगी तेरा इम्तिहान।

वो वक़्त कोई और था, जब होता था तेरा कोई अपना। अक्सर ख्वाब टूट जाता है, वो बन कर रह गया सपना।

धुँआ से घिरा आसमान, और खाख हुए अरमान। ज़िंदगी ये कदम कदम, लेगी तेरा इम्तिहान।

कोई देगा ना तेरा साथ, क्यों माने ना तू मेरी बात। पीछे मूड़ कर क्या देखे, जमाना ये अनजान। ज़िंदगी ये कदम कदम, लेगी तेरा इम्तिहान।

ज़िंदगी की राहों में रह गया तू अकेला है। तन्हाई का आलम और दर्दों का झमेला है।

कोई दे ना तुझको आवाज, अब तो बात मेरी मान। ज़िंदगी ये कदम कदम, लेगी तेरा इम्तिहान।