"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

ये इश्क़ बड़ा मुश्किल है, बहुत दूर इसमें मंजिल है। खोया खोया बेचैन सा रहता इश्क़ में हर दिल है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

कभी यार की सादगी, तो कभी होती नाराजगी। दिल की आवारगी तो होती कभी दीवानगी।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

होता यूं ही होता है, इश्क़ में यार बहुत कुछ होता है। कभी हँसता है, कभी दिल ये चोट खा कर रोता है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

होने को तो बहुत कुछ मोहब्बत में हासिल है। खोया खोया बेचैन सा रहता इश्क़ में हर दिल है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

पर कभी - कभी खफा ये तकदीर हो जाती है। यादों के शिवाय दिल को ना कोई ख़ुशी भाती है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

बेबसी जोरो पर और उदासी छाये जाती है। इश्क़ के शिवाय ना कोई चाहत राश आती है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

ये बेक़ुसूर आँखे लगे के कोई बहती सी झील है। खोया खोया बेचैन सा रहता इश्क़ में हर दिल है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

कैसे कहे इश्क़ कितना निकम्मा ये बेरहम होता है। लगे ऐसा जब बिना बात के खफा सनम होता है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

सारे दर्दो से बड़ा आशिक़ को जुदाई-ए-गम होता है। रह - रह कर दिल को जलाये ये ना कम होता है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

कैसी मोहब्बत ये हर पल इश्क़ मुश्किल है। खोया खोया बेचैन सा रहता इश्क़ में हर दिल है।

"Yeh Ishq Bada Mushkil Hai" Poetry of G. Shastri

दिल से दिल मिले, तोड़े ना ये टूटेंगे। चाहे रब्ब रूठे, हम ना तुमसे रूठेंगे।