ujh Par Haq Jatau Love Sad Poetry in Hindi

तुझ पर हक़ जताऊ तू मेरी वो अमानत नहीं। तुझे अपना कह पाऊ, मेरी वो किस्मत नहीं।

सह कर तेरे सितम पत्थरा गई आँखे, अब अश्क भी ना बहते हैं। तन्हाई को हमराह बनाया, ना किसी और को हमसफ़र कहते हैं। 

प्यार भरा दिल तोड़ दिया, क्यों मिलना मिलाना छोड़ दिया। क्यों मोहब्बत मेरी खता हुई, जो तुमने मुँह मुझ से मोड़ लिया। 

तेरे साथ रह रह कर क्यू मैं भी बेवफा हो गया। तू मुझ से खफा हुई, मैं जमाने से खफा हो गया। 

तू भी तड़प जाये, मेरी तरहा तुझको भी कोई तरसता छोड़ जाये। मेरे दर्द का अहसास हो, काश कोई पल पल मरता छोड़ जाये। 

तेरे साथ का नशा था बहुत, फिर ना ये कदम बहके हैं। कई सावन आये और गए, दिल के गुलशन ना महके हैं। 

तुझे पा कर भी पा ना सके, खुदा ने बक्सी मोहब्बत निभा ना सके। बिन तेरे छलनी दिल के जख्म हम चाह कर भी दिखा ना सके। 

आखरी तमन्ना दिल की दुनिया से रुखसत हो जाये। तू चाह कर भी ढूंढ ना सके फिर ऐसे कहीं खो जाये।