रिश्तों की दर्द भरी शायरी 2 Line - Rishton Ki Dard Bhari Shayari

अश्क बहते रहे, लब्ब मुस्कुराते रहे, ये नज़ारा बड़ा खूब हो गया। सिसकियाँ तब निकली, जब जाना कातिल मेरा महबूब हो गया।

तेरी गिरफ्त से दिल क्या फिसला, टूट के चूर हो गया। तुझे रब्ब समझ लिया, मेरे दिल का ये कुसूर हो गया।

क्या खूब तक़दीर पाई उसने, सब ख़ाख़ किया, दिल फिर भी उसे पूजता है। कत्ल उसने किया मेरे जज्बातों का, और दिल कुसूरवार खुद को मानता है।

तेरा छोड़ जाना महज़ एक बहाना था, जुदाई तो मेरी ज़िंदगी का हिस्सा था। तेरा यूँ टूट के चाहना, फिर दिल का कत्ल, यही तो मोहब्बत का किस्सा था।

क्या लिखू मैं दिल की दास्ताँ, बस दो लब्ज़ो की मेरी कहानी है। टूटा दिल और आँखों में लाली, ये मेरी मोहब्बत की निशानी है।

दिखावे से क्या जख्म भरते हैं, दिल की बात दिल में ही रहने दो। मोहब्बत में मिले हैं मुझे जख्म हज़ार, अब इनका दर्द सहने दो।

मुस्कान रही ना अश्क़ बचे, सब हार गये एक इश्क़ की चाहत में। ना इश्क़ मुकमल हुआ मेरा, ना वफ़ा मिली यार की फितरत में।

चाहे मर मिटो इश्क़ में, हद कर दो प्यार की, आखीर कम ही लगता है। फ़ना हो जाओ, बेशक लूटा दो हर घड़ी बहार की, आखीर कम ही लगता है।

जख्म भी उसका, मरहम भी उसका, और पूछते हैं कितना दर्द सीने में। लहू लोहान कर ज़िंदगी, कहते हैं कोई शिकवा तो नहीं जीवन जीने में।