“ये तेरी बेवफाई" a poignant poem penned by G. Shastri,

ये तेरी जुदाई, पल - पल की तन्हाई। मार डालेगी मुझको ये तेरी बेवफाई।

क्यू किया तुमने ये सितम, अ मेरे हमदम। क्या बिगाड़ा दिल ने जो दिये इसे जख्म।

जीने दे ना मुझको इश्क़ में जगहंसाई। मार डालेगी मुझको ये तेरी बेवफाई।

जिधर उठी नजर, देखी सिर्फ तेरी परछाई। मार डालेगी मुझको ये तेरी बेवफाई।

तेरा मेरा एक ना होना, थी क्या वो तेरी मजबूरी। साथ जीने मरने की थी कसम, फिर क्यों ये दूरी।

तड़पाती है याद तेरी, क्यों तुझे ना याद आई। मार डालेगी मुझको ये तेरी बेवफाई।

बिन तेरे मुश्किल बहुत ये ज़िंदगी का बसर। जब तलक बहेंगी सांसे, राह तकेंगी नजर।

हर हाल निभाएंगे, जो कसम मोहब्बत में खाई। मार डालेगी मुझको ये तेरी बेवफाई।