New Sad Shayari - ज़माने को बुरा क्यों लगे

वो बदले तो क्या हुआ हम भी तो बदल गए, अब कहाँ उनसे दर्द बाटते हैं।

ज़माने को बुरा क्यों लगे, जो दिल सीने में धड़कता है उसी को तो डाटते हैं।

देख के भी अनदेखा करने लगे हैं अब वो मुझे, ये रुसवाई है या सितम।

और उसकी तकदीर देखो, उसी का पक्ष लेते हैं उसके ही दिए जख्म।

बड़ी खुब किस्मत बकसी खुदा ने, मेरी अधूरी मोहब्बत की कुछ कहानी कुछ किस्से हो गए।

बेबसी कुछ इस कदर, ना मर रहे हैं, ना हम जी रहे हैं, मेरी जिंदगी के दो हिस्से हो गए।

बहने दो आँखों मोती, मोहब्बत में बकसे हैं ये तोहफे मेरे महबूब ने।

गिला क्या करू, जिन्दा तो रखा है मुझे उसके बदले इस रूप ने।