Latest shayari

जी. शास्त्री द्वारा रचित नवीनतम शायरी | Latest Shayari By G. Shastri

वो खुदा भी तेरी तारीफ़ करता, जिस खुदा ने तुझे बनाया है। तेरे चेहरे की चमक देख, चाँद भी अपने नूर से शर्माया है।

कोई हसरत ना थी तेरे सिवा दूजी, आखिरी तलब बस तेरी रही। ना तेरा प्यार जिन्दा रहा ना सांसे, बस जिन्दा तलब वो मेरी रही।

अधूरे रहे प्यार के किस्से, टुकड़ों में बट गई जिंदगी। इधर जाऊ या जाऊ उधर, खुदा ने बख्सी ये बंदगी।

जब से देखा तुझे, कलम मेरी अफ़सानो में लिख रही है। क्यों तुझे दिल का राजदार मेरे ख्यालों में लिख रही है।

जब से दस्तक हुई दिल की दहलीज पर तेरी। ये प्यार तो नहीं, जो तुझसे हटती ना नज़र मेरी।

जो गरजते हैं वो गरज के रह जाते हैं, और जो बरसते हैं वो कभी नहीं गरजते। कुछ अधूरे रह जाते हैं अरमां, हर ख्वाहिशो के आसमां रंगीन नहीं हुआ करते।

आज खरीदने की हसरत लेकर आया हु तेरे शहर में, वफ़ा मिलती है तो पता बताओ। क्या कीमत होगी तेरे शहर के वफादारों की, जरा उनकी वफ़ा की मुझे रजा बताओ।

क्या खूब अदाकारी थी उसे, दर्द को लिबास में छुपाने की। मुस्कुराती थी हरदम, जबकि कोई वजह ना थी मुस्कुराने की।