इश्क़-ए-दर्द शायरी | Ishq-E-Dard Shayari From Hindi Shayari Web.

कलम कोई छीन ले तो क्या, तुझे मुकदर लिख दू आँखों की स्याही से। तुझसे प्यारा कौन मेरी तन्हाई, हमसफ़र लिख दू आँखों की स्याही से।

प्यार मुझे प्यार हुआ है, पहली बार हुआ है, ये जो इंतजार हुआ है। एक अजनबी पर ऐतबार हुआ है, जब से उसका दीदार हुआ है।

लोग दर्द लिखते हैं, हम उनके लिए दुआ सलामत लिखते है। जो दर्द दे गए मुझे, हम उन्हें लिखने की इनायत लिखते हैं।

कितनी शांत हो गई जिंदगी, ना कोई शोर शराबा, ना किसी का आना जाना। कुछ वफादार रहे, हाथ में कलम और दीवारों पर अधूरे प्यार का अफसाना।

महफिले सजी है, फिर भी हर किसी को तन्हां देखता हूँ। बेवफाओ का शहर है तेरा, और मैं यहाँ वफ़ा लिखता हूँ।

कभी आये तो सही मेरी गली में, होठों से उठा लू आँखों के शबनम को। खुद का कतरा कतरा बिछा दू राहों में, कोई काँटा ना चुभने दू सनम को।

मेरे गीत की आबरू हो तुम, हर गजल में तुम्हे इज्जतदार लिखू। तूने लिखना सिखाया है, तुझे पहला और आखिरी प्यार लिखू।

भले भर गया तेरा मन, मैं जब भी लिखू तेरे लिए प्यास लिखू। दरमियाँ फासले हुए तो क्या, हर नग्मे में तेरा अहसास लिखू।