Ek Tarfa Mohabbat Shayari, एकतरफा प्यार शायरी by HSW

कभी दस्तक दी थी दिल की दहलीज पर, आज बस निशां रह गए। संभाल रखे थे आँखों के मोती, उसकी जुदाई में आंसू बन बह गए।

रोशन होती थी शाम उसके आने से, आज अंधेरे की चदर में लिपटी है। जब से आना छोड़ दिया उसने, मेरी जिंदगी चार दीवारी में सिमटी है।

हथेली की लकीरों में ढूंढा, हर शहर हर गाँव ढूंढा। जो प्यार नसीब ना था, कभी धुप कभी छाँव ढूंढा।

हम उसकी मुस्कान को प्रीत समझ बैठे। वो दिल बहलाते थे, हम मीत समझ बैठे।

मुझे दिल बहलाने का सामान समझ के, मेरा जहां वो लुटते रहे। वो अपने सपने सजाते रहे गैरों संग, और मेरे ख्वाब टूटते रहे।

मुस्कुराने से मुस्कुराते थे, मेरे उदास होने से उदास होते थे। वो किसी और की अमानत हुए आज, जो मेरे रोने से रोते थे।

वो दिल के राजदार तो हुए, मगर हाथ की लकीर ना बने। संग मेरे उसकी परछाई तो होती थी, पर तकदीर ना बने।

मुझ पर था जो उसका एतबार, मैं समझा के ये मोहब्बत है। जब ना आई लौटके, तब जान वो मेरी अधूरी इबादत है।