Monday, May 27, 2024
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Urdu Poetry: Tanhai Se Gufatgu

Urdu Poetry: – ये कैसी खामोशी है,

ये कैसी खामोशी है, के हर वक्त तन्हाइयों से गुफ्तगू होती है।

होंठ कंपकपाते हैं आँखें रोती हैं, जब ये सारी दुनिया सोती है।

What kind of silence is this, that it always talks with the lonely.

Lips tremble, eyes cry, when this whole world sleeps.

Urdu Poetry: – ये जतन हर बार करते हैं,

ये जतन हर बार करते हैं, के उससे गुफ्तगू की कोई सूरत तो मिले।

फिर चाहू टूट कर उसे, मेरे मन मंदिर की खफा वो मूरत तो मिले।

He tries every time to get some form of conversation with him.

Then I want him after breaking down, the anger of my heart and temple, at least he gets that idol.

Urdu Poetry: – जब किसी से गुफ्तगू होती है,

जब किसी से गुफ्तगू होती है, जुबां पर एक ही नाम आता है।

क्यों उसी का ख्याल हरदम, जिसे मेरा नाम नहीं भाता है।

When there is a conversation with someone, only one name comes on the tongue.

Why always think of the one who doesn’t like my name

Urdu Poetry: – वो बेवफा है फिर भी उससे

वो बेवफा है फिर भी उससे वफ़ा की उम्मीद मुझे रहती है।

तन्हाई से जब भी गुफ्तगू होती है, उसी की बात कहती है।

He is unfaithful, yet I expect him to be faithful.

Whenever there is a conversation with loneliness, she tells the same thing.

Urdu Poetry: – पेड़ के पत्तो सी हैं उसकी यादें,

पेड़ के पत्तो सी हैं उसकी यादें, एक टूटे चार आती हैं।

क्यों मुझे हर राज-ए-गुफ्तगू में उसकी बातें भाती हैं। 

His memories are like the leaves of a tree, one comes broken.

Why do I like his words in every secret conversation.

Urdu Poetry: – जब किसी से गुफ्तगू होती है,

जब किसी से गुफ्तगू होती है, उसके नाम पर सांसे थम जाती हैं।

जिक्र-ए-इश्क़ में उससे नाता, वो बातें मुझे बहुत तड़पाती हैं।

When there is a conversation with someone, the breath stops at his name.

Relationship with her in Zikr-e-Ishq, those things torment me a lot

Urdu Poetry: – चांदनी के आलम में चाँद से

चांदनी के आलम में चाँद से जब गुफ्तगू होती है, वो उसके मिज़ाज़ पूछता है।

बड़ा गहरा था नाता फिर क्यों खफा हुआ तुमसे, हर गुफ्तगू में वो राज़ पूछता है।

When there is a conversation with the moon in the moonlight, he asks her mood.

The relationship was very deep, then why was he angry with you, he asks secrets in every conversation

Urdu Poetry: – बड़ी लम्बी होती थी दरमियाँ गुफ्तगू,

बड़ी लम्बी होती थी दरमियाँ गुफ्तगू, वो एक जमाना था।

राज़ बन रह गया वो मंजर, उसे क्यों ना इश्क़ निभाना था।

There used to be very long conversations, that was a time.

That scene remained a secret, why didn’t he want to fulfill his love.

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