Tuesday, December 6, 2022

मजबूरी शायरी | Majboori Shayari in Hindi

Majboori Shayari - मेरी ख्वाहिशों से बड़ी हो गई है मजबूरियां,

मेरी ख्वाहिशों से बड़ी हो गई है मजबूरियां, आरजू तो थी एक झलक दीदार की।

भरी महफ़िल में नजरे तलक ना मिली, जाने क्यों उसने दुहाई दे दी थी प्यार की।

The compulsions have become bigger than my wishes, Arzoo had a glimpse of him.

The eyes did not get divorced in the crowded gathering, why did he cry for love.

Majboori Shayari

Majboori Shayari - यूँ रूठा ना कर तू यार मेरे,

यूँ रूठा ना कर तू यार मेरे, तुझसे ना मिलना मेरी मजबूरी है।

दिल सिर्फ तेरे लिए ही धड़के, भले दरमियाँ मीलो की दूरी है।

Don’t get angry like this, you are my friend, it is my compulsion not to meet you.

Heart beats only for you, good distances are miles away.

Majboori Shayari

Majboori Shayari - काश हम ज़माने से परे होते,

काश हम ज़माने से परे होते, ये मजबूरियों की बंदिश तोड़ दी होती।

नैनों का नैनों से दीदार हो जाता, ना तेरी रोती आँख ना मेरी रोती।

I wish we were beyond the age, it would have broken the shackles of compulsions.

Nain would have been visible from the nano, neither your crying eyes nor my crying

Majboori Shayari

Majboori Shayari - तेरा मिलना सौगात थी दिल को,

तेरा मिलना सौगात थी दिल को, और मिलकर बिछड़ना ये कैसी मजबूरी।

बिन तेरे जीना ना आया मुझे, सांसे थमने से पहले फिर दीदार है जरुरी।

Meeting you was a gift to the heart, and what a compulsion to part with.

I have not come to live without you, it is necessary to see you again before I stop breathing.

Majboori Shayari

Majboori Shayari - मेरी किस्मत ना थी मजबूरी,

मेरी किस्मत ना थी मजबूरी, ये तो गम-ए-ज़माने का दिया तोहफा है। 

कोई तुझ पर अंगुली ना उठाये, तेरे दर्श को तड़पती आँखों को रोका है।

My luck was not compulsive, this is a gift given by the era of sorrow.

No one should point a finger at you, your eyes have stopped the agony of your vision.

Majboori Shayari

Majboori Shayari - टूट कर चाहा था उसने,

टूट कर चाहा था उसने, आज ना मिलना उसकी कोई मजबूरी होगी।

मेरी ख्वाहिश ना पूरी हुई तो क्या, उसकी भी तो चाहत अधूरी होगी।

He wanted to break down, it would be a compulsion for him not to meet today.

What if my wish is not fulfilled, and even his wish will be incomplete?

Majboori Shayari

Majboori Shayari - इतने मजबूर हुए,

इतने मजबूर हुए, आँखों के सामने थे और दिल का हाल ना कहने दिया।

आँखे रोई तो बहुत दर्द-ए-जुदाई में, मगर अश्क ना हमने बहने दिया।

They were so compelled, were in front of their eyes, and did not let their heart be told.

Eyes cried in a lot of pain-e-separation, but we did not let the tears flow.

Majboori Shayari

Majboori Shayari - हमें बेवफा समझते रहे,

हमें बेवफा समझते रहे, और हम मजबूरियों की गिरफ्त से छूट ना पाए।

इस कदर खफा हुए, हमने अलविदा कहा, वो आखरी दीदार भी ना आए।

They kept thinking of us as unfaithful, and we could not get rid of the compulsion.

So angry, we said goodbye, even that last sight did not come.

Majboori Shayari

Related Articles

Stay Connected

9,734FansLike
255FollowersFollow
29FollowersFollow
1FollowersFollow
SubscribersSubscribe
- Advertisement -

Latest Articles