Tuesday, December 6, 2022

Khamoshi Par Shayari in Hindi, खामोशी पर शायरी

Khamoshi Par Shayari - मत पूछो मैं किसलिए खामोश हूँ।

मत पूछो मैं किसलिए खामोश हूँ।

मुझे दिल का दर्द कहना नहीं आता, इसलिए खामोश हूँ।

मत पूछो मैं किसलिए खामोश हूँ।

अश्क बनके मुझे बहना नहीं आता, इसलिए खामोश हूँ।

Don’t ask why I am silent.

I don’t know how to say heartache, so I am silent.

Don’t ask why I am silent.

I do not know how to shed tears, so I am silent.

Poetry on Silence

Khamoshi Par Shayari - उनके लिए कोई बड़ी वजह नहीं

उनके लिए कोई बड़ी वजह नहीं, पर मैंने तो अपना सब खोया है।

यूं ही खामोश नहीं हुए, ख़ामोशी से पहले बेहिसाब दिल रोया है।

There is no big reason for them, but I have lost my all.

You have not been silent like this, your heart has cried innumerable before the silence.

Poetry on Silence

Khamoshi Par Shayari - चहकते थे वो भी कभी,

चहकते थे वो भी कभी, आज चुप रहना बात गहरी है।

तुम ना समझोगे, एक जिन्दा लाश महलों में रह रही है।

Used to chirp that too, today it is deep to remain silent.

You will not understand, a living corpse is living in the palaces.

Poetry on Silence

Khamoshi Par Shayari - उस बेहया का चुप रहना,

उस बेहया का चुप रहना, कभी मुझे राश नहीं आया।

आज हम खामोश हैं, जानके भी पास वो नहीं आया।

The silence of that idiot never bothered me.

Today we are silent, even knowing that he did not come near.

Poetry on Silence

Khamoshi Par Shayari - खामोश रहना आदत कहाँ थी,

खामोश रहना आदत कहाँ थी, ये तो अधूरी उल्फत की इनायत है।

उनकी बेवफाई जग जाहिर ना हो, मेरी ख़ामोशी की ये चाहत है।

Where was the habit of being silent, this is the grace of incomplete ufat.

His infidelity should not be exposed to the world, this is my desire for silence.

Poetry on Silence

Khamoshi Par Shayari - जुबान चुप करके मेरी,

जुबान चुप करके मेरी, आँखों में अश्क भर गए हैं।

मुस्कुराने को कहते थे, वो ही खामोश कर गए हैं।

My eyes are filled with tears by keeping my tongue silent.

Used to ask to smile, they have been silenced.

Poetry on Silence

Khamoshi Par Shayari - मुझे खामोश ही रहने दो,

मुझे खामोश ही रहने दो, नहीं तो दिल का दर्द सिसक उठेगा।

टुकड़ो में बिखरा है, मेरी आवाज सुनके एक बार फिर टूटेगा।

Let me be silent, otherwise the heartache will sob.

It is scattered in pieces, will break once again after hearing my voice.

Poetry on Silence

Khamoshi Par Shayari - कोई यूं ही खामोश नहीं होता,

कोई यूं ही खामोश नहीं होता, मेरी ख़ामोशी भी दर्दों से लिपटी दास्ताँ है।

जिसे कोई पढ़ के भी पढ़ ना सका, वो जिंदगी के पन्नों में सिमटी दास्ताँ है।

No one is silent like this, my silence is also a story wrapped in pain.

What no one could read even after reading, is a story confined in the pages of life.

Poetry on Silence

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