Happy Diwali 2021: Wishes, quotes, and be careful in the corona period

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Happy Diwali 2021: Wishes, quotes, and be careful in the corona period
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Happy diwali 2021: wishes, quotes, and be careful in the corona period

कष्ट कट जाये अँधेरे मिट जाये, देवी महालक्ष्मी की कृपा हो,

दिवाली मुबारक ऐसे की, सुख समृद्धि की घर आपके वर्षा हो।

May the suffering be cut, the darkness disappears, Goddess Mahalakshmi's grace be there,

Wishing you a Happy Diwali, May it be rain in your house of happiness and prosperity.

दीयो की जगमग हो, रोशन हो जाये आपका घर आँगन। 

दिवाली यूँ आये आपके घर, खिला दे खुशियों के गुलशन। 

May the lights of the lamps be illuminated, your home's courtyard may be illuminated.

Diwali comes like this to your home, please give flowers of happiness.

किसी के बदन से सांसे, छिना किसी के मुँह से निवाला। 

बहुत कुछ बदल के रख गया ये कोरोना का साया काला। 

दुआ दिल से ये निकले, खुशियों में तबदिल हो हर लम्हा,

कोरोना को जड़ से मिटा दे, दिवाली के दीयो का उजाला। 

Breathe from someone's body, snatch morsel from someone's mouth.

A lot has changed and the shadow of this corona is black.

Prayers come out of the heart, May you be transformed into happiness every moment,

Eradicate Corona from the root, the light of Diwali's lamps.

अब के बरस फ़रिश्ते बनके दिवाली के दीये जले। 

कोरोना का नाश हो और खुशिया हर दिल में पले। 

The years of this now become angels and the diyas of Diwali are lit.

May the corona be destroyed and happiness flourish in every heart.

दिवाली के दीयों की रोशनी रोशन कर दे आपका घर द्वार। 

मंगल घड़ी लेके आये, आपके जीवन में दिवाली का त्यौहार। 

May the lights of diwali lights illuminate your door and door.

May you bring Mangal clock, the festival of Diwali in your life.

दिवाली क्यों मनाते हैं जानने के लिए और पढ़े। 

दिवाली मनाने के पीछे कई कथा पढ़ने को मिलती हैं, भारत वर्ष में दिवाली मनाने के ढंग भी भांति भांति के है। पौराणिक कथाओ और मान्यता के अनुसार नाना प्रकार की कहानी दिवाली मनाने के पीछे हैं। 

Read more to know why we celebrate Diwali.

There are many stories to be read behind celebrating Diwali, there are different ways of celebrating Diwali in India. According to mythology and belief, different types of stories are behind celebrating Diwali.

  • भगवान राम का वनवास से लौटना। 

रामायण के अनुसार माता कैकई ने राजा दशरथ से राम को 14 वर्ष का वनवास माँगा था, राजा दशरथ अपना वचन तोड़ नहीं पाए, और अपने पुत्र राम को 14 वर्ष वनवास का आदेश दे दिया, ततपश्चात भगवान राम अपने पिता के आदेश का पालन करते हुए पिता से आशीर्वाद लेके वनवास को चले गये, साथ सीता माता और लक्ष्मण भी, और जब भगवान श्री राम 14 वर्ष का वनवास पूरा करके अयोध्या लोटे तब कार्तिक मास के अमावस्या की रात थी अयोध्या वासियों ने भगवान श्री राम के स्वागत में पूरी अयोध्या को दीयों से सजा दिया था, दीयों की रौशनी से अमास्या की काली रात रोशन हो गई थी तब से हर साल कार्तिक मास की अमावस्या की रात दीयों से रौशनी की जाती है और दिवाली का त्यौहार मनाया जाता है। 

  • Return of Lord Rama from exile.

According to Ramayana, Mata Kaikeyi had asked King Dasharatha to exile Rama for 14 years, King Dasharatha could not break his promise, and ordered his son Rama to be exiled for 14 years, after that Lord Rama following his father's order. Taking blessings from his father, he went to exile, along with Sita Mata and Lakshmana, and when Lord Shri Ram returned to Ayodhya after completing 14 years of exile, it was on the night of Amavasya of Kartik month. Since then, every year the new moon night of Kartik month is lit with diyas and the festival of Diwali is celebrated.

  • लक्ष्मी जी की उत्पति 

पौराणिक ग्रंथो के अनुसार दूध के सागर जिसे केशर सागर के नाम से जाना जाता है उसमे कार्तिक मास की अमावस्या के रात्रि को माता लक्ष्मी प्रकट हुई हैं और साथ थी समुंद्र मंथन के दोहरान आरोग्ये देव धन्वंतरि और भगवान कुबेर जी महाराज की उतप्ति हुई मानी जाती है तब से दिवाली की रात्रि को माता लक्ष्मी, धन्वंतरि और कुबेर जी महाराज को पूजा जाता है। 

  • Origin of Lakshmi

According to mythological texts, in the ocean of milk, which is known as Keshar Sagar, Mata Lakshmi has appeared on the new moon night of Kartik month and was accompanied by the repetition of ocean churning. Since then, Goddess Lakshmi, Dhanvantari and Kuber Ji Maharaj are worshiped on the night of Diwali.

  • शक्ति में महाकाली का रूप धारण किया। 

कहा जाता है माँ भगवती दारुक नाम के असुर जिसे ब्रम्हा का वरदान प्राप्त है उसका नाश करने के लिए विकराल रूप धारण किया जिसे माँ काली के नाम से जाना जाता है, ये भी कहा जाता है की माँ काली का दारुक असुर का वध करने के बाद भी क्रोध शांत नहीं हुआ तो स्वयं भगवान शिव माँ काली के पैरो में लेट गए थे और शिव के स्पर्श मात्र से माँ काली का क्रोध शांत हो गया था कहा जाता है उस दिन कार्तिक मास की अमावस्या थी, दारुक असुर के अंत से खुश हो के लोगों ने घी के दीये जलाये थे। 

  • In Shakti took the form of Mahakali.

It is said that Maa Bhagwati took a formidable form to destroy the demon named Daruk, who is blessed with Brahma, who is known as Maa Kali, it is also said that after killing the demon Daruk of Mother Kali Even if the anger did not subside, then Lord Shiva himself lay down at the feet of Maa Kali and by the touch of Shiva, the anger of Maa Kali was pacified. People lit lamps of ghee.

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