वो बेहया मुस्कुराती रहे

ज़ुल्मो सितम सह जाऊ, वो बेहया मुस्कुराती रहे।

तड़पन के दरिया बह जाऊ, वो बेहया मुस्कुराती रहे।

उसका बहे आंसू, हद होती है मेरी बर्दास्त की।

उम्मीदें तो रखी थी, बड़ी बिखरी माला हर आश की।

कोई है भी तो नहीं, उस बेरहम के सिवाय

फिर जाने क्यों ना फ़िक्र है, उसे मेरी प्यास की।

उल्फत ऐ इश्क़ में मिट जाऊ, वो बेहया मुस्कुराती रहे।

आसिया बसाने के चक्कर में, उजड़ी दुनिया सारी।

हर अदा मिटा दी, जो थी जान से प्यारी।

आँखे नम रहती हैं, अश्क़ बनी मेरी यारी।

मेरी हर ख़ुशी पर चली, उस बेरहम की आरी।

राहों में फूल बन बिछ जाऊ, वो बेहया मुस्कुराती रहे।

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