ना दौलत चाहिए

ना दौलत चाहिए, ना चाहिए मुझे शौहरत।

कोई ना चाहत मुझे सिर्फ है मेरी माँ की जरुरत।

माँ है तो सब कुछ वरना कुछ भी नहीं है।

जिसे मेरे दर्द का अहसास है, एकलौती वही है।

मेरी एक मुस्कान के लिए, हजार तकलीफ़ उठा के पाती थी राहत।

कोई ना चाहत मुझे……………………….

मैं रूठता था वो मानती थी।

मैं झगड़ता था वो बहलाती थी।

मेरे आंसू खुद की आँखों से रो के ,मुझे सम्भालती थी।

दर दर की ठोकर खाई तब जाना माँ के चरणों में थी जन्नत।

कोई ना चाहत मुझे……………………….

माँ के साथ बिताये लम्हे जब याद आते हैं। मैं तड़प तड़प के रोता हु।

बहुत कुछ कमाया ज़िंदगी में, फिर भी चैन ओ सुकून खोता हु ।

कुछ पा के कुछ ना पाया, बिन माँ के कुछ ना भाया।

दिल लगे ना कही मेरा , बिन माँ के डरा डरा सा होता हु।

कैसे भूल गया मैं जो जी रहा जीवन, वो है माँ की बदौलत।

कोई ना चाहत मुझे……………………….

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