माँ से बड़ा ना कोई वफ़ादार है

ज़िंदगी भी दे जाये धोखा ,माँ से बड़ा ना कोई वफ़ादार है।

हर कोई पहचान ने को इंकार कर दे, एक माँ दावेदार है।

सब कुछ किया है, सब कुछ करती है।

जरा देर हुई के औलाद के आने की राह तकती है।

ख्यालो में खो के ,कभी सहमती है, कभी डरती है।

जब तक देखे ना सूरत वो निग़ाहें दरवाजे पर बिछाके रखती है।

औलाद के लिए खुद को भूला दे, ऐसा माँ का प्यार है।

हर कोई पहचान ने………………………

कभी क़र्ज़ उतारा ना किसी ने, ना कोई माँ के जितना कर पायेगा।

उसने वो कर दिया तेरे लिए, उतना कोई सात जन्म ना कर पायेगा।

सोच जरा हजारो खुशियों के बदले, क्या तू कुछ पल की ख़ुशी दे पायेगा।

झुक के तो देख ले प्यारे, उसके चरणों में स्वर्ग नज़र आयेगा।

जिसकी की ना परवाह, उस माँ को तेरा आज भी इंतज़ार है।

हर कोई पहचान ने………………………

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